मानस भवन लाखों रामानुरागी भाई बहिनों का श्रद्धा क्रेन्द्र रहा है। संवत 2031 वि.(1974) में रामचरितमानस की रचना के 400 वर्ष पूर्ण हुए। इस मंगल अवसर को पूरे देष में पूर्व प्रधानमंत्री माननीया श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में रामचरितमानस चतुष्षताब्दी समारोह समिति गठित हुई। प्रत्येक राज्य में माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय चतुष्षताब्दी समारोह समिति गठित हुई।
मध्यप्रदेष की समिति दिनांक 8 जून 1970 को पंजीयन क्रमांक 1726 के अंतर्गत गठित की गयी तथा चतुष्षताब्दी समारोह समिति के पष्चात प्रासंगिकता की दृष्टि से वर्ष 2004 में इसका नाम ‘तुलसी मानस प्रतिष्ठान’ परिवर्तित कर दिया गया। परंपरानुसार समिति के अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री तथा उपाध्यक्ष माननीय संस्कृति मंत्री तथा षिक्षा/ धर्मस्व मंत्री होते है और यह परंपरा सन 70 से यथावत चली आ रही है।
मानस भवन के लिये मध्यप्रदेषषासन ने उदारतापूर्वक भोपाल के अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र ष्यामला हिल्स,भोपाल में पौने दो एकड़ भूमि (76000) वर्गफीट निःषुल्क 1/-प्रति वर्ष पर लीज पर प्रदान की। अनेक महानुभावों के सहयोग से मानस भवन का निर्माण कार्य 1991 से प्रारंभ हुआ और दिसंबर 2014 में श्री सिद्ध रघुनाथ मंदिर के निर्माण के बाद पूर्ण हुआ। इस महत् कार्य में अनेक महानुभावों ने मदद की है ; किन्तु विषेष रूप से माननीय नरसिंहराव दीक्षित एवं माननीय श्री लक्ष्मीनारायण षर्मा का योगदान अतुलनीय है।
इन महानुभावों के माध्यम से माननीय सासंद सदस्यों की विकास निधि से रू. 30 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ। माननीय श्री मोतीलाल वोरा तत्कालीन राज्यपाल उत्तरप्रदेष से रू. 20 लाख का अनुदान तथा भारतषासन से रू. 15 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ।
मानस भवन के संपूर्ण विकास की परिकल्पना एक त्रिसदस्यीय समिति ने प्रारंभ में तैयार की जिसके सदस्य थे-
श्री एल.एच.भाटिया
श्री एस.नगाइच
श्री सी.बी.कांड
ये तीनों महानुभाव मध्यप्रदेष लोक निर्माण विभाग के यषस्वी मुख्य अभियंता/सचिव रहे है।
परिसर के वास्तुविदों में सर्वप्रथम श्री टी.एम.घाटे,रायपुर द्वारा क्षेत्र को दो अलग-अलग हिस्सों में रखा गया। एक में मानस भवन तथा दूसरे में मुक्ताकाष मंच तथा 4000 प्रेक्षकों के लिये मुक्ताकाष मंच स्थापित किया गया। उनकी इस कल्पना को विस्तृत रूप दिया वास्तुविद श्रीअजय बोरकर एवं श्री सुयष कुलश्रेष्ठ ने। श्री सुयष कुलश्रेष्ठ न केवल संस्था के आजीवन सदस्य हैं बल्कि निर्माण के हर कदम पर उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
मानस भवन का नक्षा तथा आंतरिक व्यवस्था के लिये श्री सी.बी.कांड पूर्व मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग भोपाल ने आरंभ से अंतिम कदम तक निरंतर मार्गदर्षन करते रहे।
मानस भवन के निर्माण में ठेकेदारों में श्री परमानंद नारंग एवं श्री मदनलाल गांधी ने अनेक कठिनाइयों के रहते हुए भी निर्माण कार्य को किफायत एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण किया।